कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की सिग्नल कोर की एक जांबाज अधिकारी हैं. जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में भारत का नेतृत्व कर देश का गौरव बढ़ाया है. वह पहली भारतीय महिला अधिकारी हैं जिन्होंने मल्टीनेशनल मिलिट्री ड्रिल में टुकड़ी की कमान संभाली.
भारत की बेटियां अब सिर्फ सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहीं,बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी देश की बुलंद आवाज बन रही हैं. हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब वैश्विक मीडिया के सामने भारत का पक्ष मजबूती से रखने की बारी आई,तो भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई. इस प्रेस ब्रीफिंग में विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे. यह पल भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का ऐतिहासिक प्रतीक बन गया.
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कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी?
कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की वो बहादुर अफसर हैं जिन्होंने अपने साहस,समर्पण और नेतृत्व क्षमता से न सिर्फ देश में,बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति अर्जित की है. उन्हें उस समय व्यापक पहचान मिली जब उन्होंने एक्सरसाइज फोर्स 18 के तहत 18 देशों की मल्टीनेशनल मिलिट्री ड्रिल में भारत की ओर से कमान संभाली. खास बात यह रही कि उस अभ्यास में वह इकलौती महिला अधिकारी थीं. जो किसी देश की सैन्य टुकड़ी की कमांड कर रही थीं. उन्होंने इस अभियान में 40 भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया.
प्रेरणादायक है सोफिया कुरैशी का सफर
गुजरात की रहने वाली कर्नल सोफिया ने बायोकैमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. विज्ञान की पढ़ाई और सेना के तकनीकी प्रशिक्षण का उनका यह मेल उन्हें एक अलग मुकाम पर पहुंचाता है. वह भारतीय सेना की सिग्नल कोर से ताल्लुक रखती हैं,जो सेना की संचार और सूचना प्रणाली का संचालन करती है.
उनका करियर सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहा. साल 2006 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत कांगो में अपनी सेवाएं दी थीं और पिछले छह वर्षों से अधिक समय से वह अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों का हिस्सा रही हैं. उन्हें यूएन पीसकीपिंग ट्रेनिंग ग्रुप से चुना गया जो दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण समूहों में से एक है.

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